Safed Musli ke fayde aur nuksan – सफेद मुसली के औषधीय गुण

दोस्तों अक्सर आपने सफेद मूसली का नाम तो सुना ही होगा। आयुर्वेद में इसका वर्णन प्रमुख वाजीकारक दवाओं के रूप में किया जाता है। वर्तमान समय में भी बहुत सारे बल वीर्य वर्धक और शक्तिवर्धक कैप्सूल और दवाओं में इसका प्रयोग बहुतायत से किया जाता है। आज हम इस लेख के माध्यम से सफेद मूसली के फायदे (safed musli ke fayde) के बारे में विस्तारपूर्वक जानेंगे…

सफेद मूसली का परिचय-introduction to safed musli

सफेद मूसली का वैज्ञानिक नाम Chlorophytum borivilianum है। सफेद मूसली का प्रयोग मर्दाना शक्ति को बढ़ाने के लिए तो किया ही जाता है इसके साथ ही साथ इसका प्रयोग शरीर की अन्य समस्याओं और रोगों को दूर करने के लिए भी किया जाता है। सफेद मूसली का प्रयोग मधुमेह, गठिया व यूटीआई जैसे रोगों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।

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सफेद मुसली की खेती- farming of safed musli

इस चमत्कारी औषधि सफेद मूसली का उत्पादन प्रमुख रूप से अफगानिस्तान ईरान इराक व आसपास के इलाकों में किया जाता था। इसके उत्पादन के लिए रेतीली मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त मानी गई है। इसकी दिनों दिन बढ़ती मांग और चमत्कारी औषधीय गुणों को देखते हुए भारत में भी इसकी खेती व्यापक रूप में की जाने लगी है।

सफेद मूसली का इस्तेमाल करने योग्य भाग- usable part of safed musli

मुख्य रूप से सफेद मूसली का औषधि के रूप में इसकी जड़ों का प्रयोग किया जाता है। सफेद मूसली की जड़ों का प्रयोग इन को सुखाकर किया जाता है। इन सूखी हुई जड़ों का जोड़ तैयार किया जाता है और मार्केट में अलग-अलग प्रकार के पैक में बेचा जाता है।

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सफेद मूसली के पोषक तत्व- nutrients of of safed musli

सफेद मूसली की जड़ों के चूर्ण में मुख्यता कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिंस, प्रोटीन, फाइबर और बहुत से खनिज तत्व पाए जाते हैं। यही कारण है कि सफेद मूसली हर प्रकार की शारीरिक कमजोरी को दूर करती है और पौरूष शक्ति को बढ़ाने के लिए एक कारगर दवा मानी जाती है।

सफेद मुसली कौन-कौन से रोगों को दूर करने में सहायक है?

इस औषधि का प्रयोग करने से अर्थराइटिस, कैंसर, जोड़ों का दर्द, मधुमेह अर्थात डायबिटीज व नपुंसकता आदि समस्या से बचा जा सकता है। परंतु इस बात का अवश्य ध्यान रखना चाहिए की सफेद मूसली का प्रयोग अलग-अलग रोगों को ठीक करने के लिए अलग-अलग प्रकार से किया जाता है।

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निम्न समस्याओं में भी सफेद मूसली बहुत ही कारगर औषधि साबित हुई है…

  • मूत्र विकारों को दूर करने के लिए
  • अर्थराइटिस रोग को दूर करने के लिए
  • शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए
  • नपुंसकता को दूर करने के लिए
  • इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को दूर करने के लिए
  • स्वप्नदोष की समस्या को दूर करने के लिए
  • बॉडीबिल्डिंग के लिए
  • मोटापा कम करने के लिए आदि।

सफेद मुसली खाने की विधि- method of consuming safed musli

दोस्तों अगर बात की जाए सफेद मूसली के सेवन की विधि के बारे में तो इसकी सेवन की जाने वाली मात्रा का ख्याल रखना बहुत ही आवश्यक हो जाता है।

यदि आप बाजार से सफेद मूसली का चूर्ण खरीदते हैं तो इसके पैक के ऊपर इसकी सेवन विधि और मात्रा अवश्य दर्शाई गई होती है। लेकिन उचित यह होगा कि आप चिकित्सक की देखरेख में ही इस औषधि का प्रयोग करें क्योंकि कुछ मामलों में सफेद मूसली के साइड इफेक्ट भी देखने को मिले हैं।

मूसली की सुरक्षित सेवन मात्रा चूर्ण के रूप में 1 से 2 ग्राम दिन में दो बार बताई गई है। यदि आप बाजार से कैप्सूल्स ले आते हैं तो उसका प्रयोग अपने चिकित्सक के निर्देशानुसार करें। दोस्तों

इसका प्रयोग चिकित्सक की सलाह से प्रत्येक स्त्री-पुरुष कर सकता है, किंतु याद रखें यह औषधि किशोरों और बच्चों के लिए बिल्कुल नहीं है।

सफेद मुसली के साइड इफेक्ट्स- side effects of safed musli

दोस्तों बहुत से अवश्य भी गुण रखने वाली यह औषधि कुछ मामलों में नुकसानदायक भी साबित होती है, इसका आवश्यकता से अधिक सेवन करने से निम्न समस्याएं देखने को मिल सकती हैं-

  1. कब में बढ़ोतरी होना
  2. पाचन क्रिया प्रभावित होना
  3. भूख कम लगना
  4. जी मिचलाना
  5. हल्का सिर दर्द या चक्कर आना आदि।

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सफेद मूसली की सेवन में हमें खास सावधानी बरतनी चाहिए और बताई गई मात्रा और विधि के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए। कोई भी समस्या होने पर अपने चिकित्सक से जल्द परामर्श कर लेना चाहिए।

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