भारत में भीं तेजी से अपनाने लगे हैं लोग : सुजोक थेरेपी, जानिए ये 10 बड़े कारण

sujok therapy in india
दोस्तों ऐसा माना जाता है कि सुजोक थेरेपी का जन्म कोरिया देश में हुआ था। किंतु यदि वर्तमान परिपेक्ष में देखा जाए तो आज सुजॉक थेरेपी का प्रयोग दुनिया भर में विभिन्न रोगों को ठीक करने के लिए किया जा रहा है।
 

सुजोक थेरेपी का परिचय-

दोस्तों सुजोक थेरेपी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसके कोई दुष्परिणाम नहीं होते हैं। यह थेरेपी कुछ हद तक एक्यूप्रेशर के समान ही है। इस थेरेपी द्वारा बहुत से पुराने रोगों का इलाज भी संभव हो जाता है। सुजोक थेरेपी में कुछ छोटे-छोटे मैग्नेट्स अर्थात चुंबक का प्रयोग किया जाता है जिन्हें शरीर के विभिन्न अंगों के विशेष बिंदु पर टेप की सहायता से चिपका कर दबाव डाला जाता है।
दोस्तों सुजॉक थेरेपी उपचार का एक ऐसा तरीका है जिसमें दवाओं के बिना विभिन्न रोगों का उपचार सरलता पूर्वक व प्रभावी ढंग से किया जाता है। आजकल बहुत से लोग इस सुजॉक थेरेपी को एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में अपनाने लगे हैं।
 
सुजॉक थेरेपी के अधिकांश दबाव बिंदु जिन्हें K points भी कहा जाता है मुख्य रूप से हथेलियों, पैर की एड़ियों व सिर पर पाए जाते हैं।
दोस्तों मात्र हथेलियों में ही सुजॉक थेरेपी के ये पॉइंट्स लगभग 20 से 30 तक पाए जाते हैं। यह सभी पॉइंट्स शरीर के विभिन्न अंगों जैसे मस्तिष्क, ह्रदय, लीवर, फेफड़े, आमाशय, गुर्दे, मूत्राशय व अंडकोष आदि के लिए उत्तरदाई होते हैं।
 
निम्न दिए गए चार्ट को ध्यान पूर्वक देखें-
 
sujok therapy organs

 

जानिए सूजोक थेरेपी किन लोगों के लिए है अधिक फायदेमंद-

दोस्तों वैसे तो सुजॉक थेरेपी शरीर की बहुत सी बीमारियों को दूर करने के लिए प्रयोग की जा सकती है किंतु इसका अधिकांश प्रयोग सिर दर्द, रक्तचाप, पैरालिसिस, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, गैस्ट्रिक, एसिडिटी अल्सर, कब्ज, माइग्रेन जैसे रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है।
इसके अलावा सुजोक थेरेपी का प्रयोग अपनी मनोदशा को सुधारने के लिए भी किया जा सकता है। सुजोक थेरेपी का प्रयोग करके विभिन्न मनोदशाओं जैसे चिंता, अवसाद और तनाव से भी छुटकारा पाया जा सकता है।
 

जानिए सुजोक थेरेपी आधारित सीड-थेरेपी क्या है?

दोस्तों सुजोक थेरेपी की ही तरह एक अन्य थेरेपी है जिसका नाम है- सीड थेरेपी। बस यहां पर मैग्नेट अर्थात चुंबक के स्थान पर विभिन्न सीड्स अर्थात बीजों जैसे अरहर, मूंग व उड़द आदि का प्रयोग किया जाता है।
कभी-कभी कुछ बड़े बीज जैसे मटर व काली मिर्च का भी प्रयोग किया जाता है। यह पूरी तरह से रोग पर निर्भर करता है कि कौन से वक्त कितने बड़े आकार के बीज इस थेरेपी में प्रयोग किए जाएंगे।
 

जानिए सुजोक थेरेपी कब हुआ किस प्रकार ली जानी चाहिए-

दोस्तों सुजोक थेरेपी को किसी भी उम्र वर्ग का कोई भी व्यक्ति किसी रोग विशेष को ठीक करने के लिए प्रयोग कर सकता है। बस ध्यान इस बात का ही रखना होगा कि इस थेरेपी की शुरुआत किसी अच्छे प्रमाणित विशेषज्ञ की देखरेख में की जानी चाहिए।
इस थेरेपी को लेने के लिए आपको चिकित्सालय में भर्ती होना नहीं पड़ता है। विशेषज्ञ से भली-भांति जानकारी प्राप्त करके आप यह थेरेपी अपने आप या किसी सहयोगी जैसे भाई-बहन, पत्नी आदि की मदद से अपने स्वयं के घर पर भी ले सकते हैं।
 
sujok therapy points

 

सुजोक थेरेपी में ली जाने वाली सावधानियां-

दोस्तों सुजॉक थेरेपी का कोई भी साइड इफेक्ट अर्थात दुष्परिणाम नहीं है किंतु फिर भी यदि इसका प्रयोग सही प्रकार से ना किया जाए तो रोगी को समुचित लाभ नहीं मिल पाता है।
मैग्नेट्स अर्थात चुंबक को सही बिंदु पर न लगाने से रोगों के उपचार में दिक्कत सामने आती है जिसके फल स्वरूप वांछित परिणाम देखने को नहीं मिलते हैं।
 

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